50+ Best Muharram Shayari in Hindi | Imam Hussain Shayari

Muharram Shayari

मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है और यह त्याग, बलिदान, सब्र और इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल माना जाता है। खासकर 10 मुहर्रम यानी आशूरा का दिन इमाम हुसैन (रज़ि.) और करबला के शहीदों की याद में पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसी पवित्र अवसर पर लोग अपने जज़्बात और अकीदत को व्यक्त करने के लिए Muharram Shayari, Karbala Shayari, Imam Hussain Shayari, और 10 Muharram Shayari पढ़ना और साझा करना पसंद करते हैं।

इस पोस्ट में हम आपके लिए बेहतरीन मुहर्रम शायरी का संग्रह लेकर आए हैं, जो करबला की कुर्बानी, हुसैनियत के संदेश और इंसानियत की जीत को खूबसूरती से बयां करती हैं। इन शायरियों को आप अपने प्रियजनों के साथ साझा करके मुहर्रम की अहमियत को महसूस कर सकते हैं।

Muharram Shayari

Muharram Shayari
Muharram Shayari
रगों में जिसके बहता था अली और फातिमा का ख़ून
वो कैसे सह लेता भला ज़ालिम का ये कानून
नवासा-ए-रसूल ने वो ज़रा सी उम्र में कर दिया
कि आज तक है ज़माने के दिलों में वो सुकून !!
नमाज़ तो सब पढ़ते हैं मगर वो नमाज़ कुछ और थी
जो तीरों के साए में और ख़ंजर के नीचे पढ़ी गई
हुसैन ने उस आख़िरी सजदे में वो लाज़ रख ली
कि कयामत तक के लिए दीन की बुनियाद बच गई !!
क्या जलवा कर्बला में मोहम्मद के लाल का
सूखा था गला फिर भी तेवर कमाल का
नेज़े की नोक पर भी पढ़ी जिसने आयतें
कोई मिसाल दे तो ज़रा इस जलाल का !!
पानी की तलब हो तो तरसो न हुसैन की तरह
इस्लाम को बचाना हो तो बिखरो न हुसैन की तरह
दे दी जान मगर हक़ का दामन न छोड़ा
दुनिया में कोई दूसरा चमका न हुसैन की तरह !!
मुहर्रम का महीना आते ही दिल भर आता है
कर्बला का वो मंज़र आँखों में तैर जाता है
६ महीने का असग़र और वो तीन भाल का तीर
ये सोच कर ही पत्थर का दिल भी पिघल जाता है !!

Dard Muharram Shayari in Hindi

Dard Muharram Shayari in Hindi
Dard Muharram Shayari in Hindi
तलवारें थक गईं मगर हुसैन का सब्र न थका
ज़ुल्म हार गया मगर हक़ का हौसला न बिका
वो बहत्तर (72) जानसार जो कुर्बान हो गए
उनके दम से ही आज तक है ये दीन टिका !!
आँखों को कोई अच्छी सी सौगात दे दें
रोए जो हुसैन की याद में वो बरसात दे दें
ऐ ज़मीन-ए-कर्बला तू गवाह रहना इस बात की
हम अपनी हर साँस हुसैन के नाम कर दें !!
नबी का ख़ून था जो कर्बला की ख़ाक पर बहा
मगर वो लहू आज भी दीन का गवाह रहा
मिट गए मिटाने वाले इमाम की याद को
हुसैन कल भी ज़िंदा था, हुसैन आज भी ज़िंदा रहा !!
हुसैन की याद में जो आँख नम नहीं होती
कसम ख़ुदा की वो आँख मोतबर नहीं होती
जो बहते हैं अश्क अज़ा-ए-हुसैन में
उन अश्कों की क़ीमत कभी कम नहीं होती !!
सजदे से कर्बला को वो तक़दीर मिल गई
बातिल को मिटाने की वो शमशीर मिल गई
जिसने भी सुना ज़िक्र-ए-शहादत-ए-हुसैन
रोते हुए ज़मीर को तासीर मिल गई !!

Muharram Shayari in Hindi

Muharram Shayari in Hindi
Muharram Shayari Hindi
तरसता रह गया पानी हुसैन के कुनबे को
मगर वो प्यास भी दरिया को मात दे गई
झुकाया सिर न जिसने ज़ुल्म के आगे कभी
वो एक शहादत पूरे इस्लाम को हयात दे गई !!
कट गया सर मगर ज़ालिम के आगे झुका नहीं
वो कारवां-ए-हक़ था जो रास्तों में रुका नहीं
ज़ुल्म ने तो अपनी तरफ से कोई कसर न छोड़ी थी
मगर जो मिट के भी अमर रहा वो हौसला थमा नहीं !!
अपनी तक़दीर जगाते है तेरे मातम से
खून की राह बिछाते हैं तेरे मातम से
अपने इज़हार-ए-अक़ीदत का सिलसिला ये है
हम नया साल मनाते है तेरे मातम से !!
सिरों को काट कर भी वो अता-ए-दीन करते हैं
नबी के लाडले हर हाल में यक़ीन करते हैं
यज़ीद जीत कर भी आज तक है हारा हुआ
हुसैन हार कर भी दिलों पर हुकूमत करते हैं !!
ये मातम, ये आँसू, ये ग़म की सदा
सब कहते हैं हुसैन ज़िन्दा है हमेशा
हर मोहर्रम में दिल से आवाज़ उठती है
जो हक़ पे मरे, वो कभी मरता नहीं !!

Sad Muharram Shayari

Sad Muharram Shayari
Sad Muharram Shayari
जब तक हमारी साँसों में रवानियाँ रहेंगी
महफ़िल में हुसैन की कहानियाँ रहेंगी
कोई क्या मिटाएगा अज़ादारी-ए-हुसैन को
हमारे अश्कों में इसकी निशानियाँ रहेंगी !!
सब्र की इंतिहा है मोहम्मद का घराना
सीखा दिया दुनिया को हक़ के लिए मिट जाना
असग़र के सूखे होठों की वो मुस्कुराहट
तीर के आगे भी था वो सब्र का ज़माना !!
तारीख़ लिख रही है लहू से वो दास्ताँ
जिस पर नाज़ करता है आज भी ये आसमा
सिर्फ बहत्तर (72) थे मगर भारी पड़े वो लाख पर
क्योंकि उनके साथ था ख़ुदा और हक़ का कारवां !!
हुसैन वो हैं जो हर दौर में ज़िंदा रहेंगे
यज़ीद जैसे तो मिट्टी में मिल के ख़ाक हुए
नमाज़ पढ़ती है आज भी जिस ख़ून को चूमकर
वो पाकीज़ा बदन कर्बला में ज़ख़्मों से चाक हुए !!
ना तलवार से, ना फौज से डर लगे
जब बात हो हक़ की, तो हुसैन याद आए
कुर्बानी की जो मिसाल बन गए
उनके नाम से दिल रो पड़ जाए !!

Imam Hussain Muharram Shayari

Imam Hussain Muharram Shayari
Imam Hussain Shayari
ज़ुल्म के आगे जो न झुके उसे हुसैन कहते हैं
जो मर के भी ज़िंदा रहे उसे हुसैन कहते हैं
यज़ीद था एक वक़्त का बादशाह मगर
जो दिलों पर राज करे उसे हुसैन कहते हैं !!
मुहर्रम का ये महीना, है सब्र की मिसाल
जहाँ हर दिल में है दर्द, और हर आंख में हाल
इमाम हुसैन की शहादत ने दी हमें राह
सिखाई इंसाफ़ और दिया न्याय का पैगाम !!
मिटा नहीं सकी जिसे सदियों की दुश्मनी
वो परचम-ए-हुसैन आज भी बुलंद है
यज़ीदियत तो दफ़्न हो गई इतिहास में
हुसैनीयत का डंका हर ज़माने में पसंद है !!
एक दिन बड़े गुरूर से कहने लगी ज़मीन
ऐ मेरे नसीब में परचम हुसैन का
फिर चाँद ने कहा मेरे सीने के दाग देख
होता है आसमान पर भी मातम हुसैन का !!
दश्त-ए-बाला को अर्श का जीना बना दिया
जंगल को मुहम्मद का मदीना बना दिया
हर जर्रे को नज़फ का नगीना बना दिया
हुसैन तुमने मरने को जीना बना दिया !!

Karbala Muharram Shayari

Karbala Muharram Shayari
हर दौर के यज़ीद को ललकारती रहेगी
ये ख़ाक-ए-कर्बला यूँ ही पुकारती रहेगी
जब तक रहेगा दुनिया में नाम-ए-खुदा वफ़ा
हुसैनीयत ज़माने को सँवारती रहेगी !!
मिट गया ज़ुल्म का नाम-ओ-निशाँ कर्बला के बाद
गूँज रही है सिर्फ या हुसैन की सदा कर्बला के बाद !!
 अपनी तकदीर जगाते हैं तेरे मातम से
खून की राह बिछाते हैं तेरे मातम से
अपनी इजहारे-ए-अकीदत का सिलसिला ये है
हम नया साल मनाते हैं तेरे मातम से !!
अजीब इश्क़ था शब्बीर का भी साज़िश में
तवाफ़-ए-काबा छोड़ दिया हक़ की ख़्वाहिश में
बचा लिया जो दीन को अपने ख़ून से
वो सजदा अमर हो गया कर्बला की आज़माइश में !!
कर्बला को सिर्फ एक जंग का मैदान मत समझो
ये तो स्कूल है दुनिया को जगाने के लिए
जहाँ पर एक बूढ़े बाप ने असग़र को दे दिया
इस्लाम के मुरझाए हुए गुलशन को बचाने के लिए !!

Muharram Shayari 2 Line

Muharram Shayari 2 Line
कत्ल-ए-हुसैन असल में मर्ग-ए-यज़ीद है
इस्लाम ज़िंदा होता है हर कर्बला के बाद !!
10 मुहर्रम का दिन हमें याद दिलाता है
सच्चाई का रास्ता ही कामयाबी तक ले जाता है !!
जो हक़ की खातिर हर सितम सह गया
वो हुसैन था जो कर्बला में अमर हो गया !!
कर्बला की दास्तां दिलों में बसाए रखना
हुसैन की राह पर खुद को चलाए रखना !!
अज़ब शान है हुसैन तुम्हारे लश्कर की
जहाँ पानी न मिला वहाँ ख़ून से तारीख़ लिख दी !!

10 Muharram Shayari

10 Muharram Shayari
वफ़ा को नाज़ है जिस पर उसे अब्बास कहते हैं
जो हर प्यासे की बन जाए आस उसे अब्बास कहते हैं
कटा दिए हाथ मगर परचम न झुकने दिया
शाह-ए-कर्बला का जो था ख़ास उसे अब्बास कहते हैं !!
मिटा दो ज़ुल्म को दुनिया से यही पैग़ाम है उनका
जियो तो हक़ के लिए वरना जीना क्या है सोचना
जो डर गया वो समझो यज़ीद के रास्ते पे है
जो अड़ गया वही तो है हुसैन का दीवाना !!
ज़माने में जहाँ भी ज़ुल्म का परचम सँभलता है
वहाँ हुसैन की यादों का एक दरिया उबलता है
यज़ीदी सोच तो हर दौर में दम तोड़ देती है
हुसैनी अज़्म हर माथे पे बन के नूर चमकता है !!
यूँ ही नहीं जहाँ में चर्चा हुसैन का
कुछ देख के हुआ था जमाना हुसैन का
सर दे के जो जहाँ की हुकूमत खरीद ली
महँगा पड़ा यजीद को सौदा हुसैन का !!
किया था जिसने दावा कि मैं हूँ जहाँ का मालिक
वो नाम आज गालियों के साए में छुपा है
और जिसने दे दी जान सिर्फ़ ख़ुदा के लिए
उसका नाम हर ज़बाँ पर दुआ बन के सजा है !!

Muharram Shayari in Urdu

Muharram Shayari in Urdu
Muharram Shayari Urdu
कफ़न बाँध कर जो हक़ की राह में निकलते हैं
वो हुसैन के नक्श-ए-क़दम पर चलते हैं
जिन्हें ख़ौफ़ नहीं होता दुनिया के ज़ालिमों का
उनके दिलों में सिर्फ या हुसैन के दीये जलते हैं !!
यज़ीद जीत कर भी सदियों से रो रहा है
हुसैन हार कर भी हर दौर में मुस्कुरा रहा है
ताकत और ज़ुल्म का वो गुरूर मिट्टी में मिल गया
और सब्र का वो परचम आसमाँ को छू रहा है !!
सर दे दिया पर हाथ न दिया यज़ीद के हाथ में
हुसैन ने सिखाया है कैसे जिया जाता है बात में
मिटा दिया खुद को दीन-ए-मुस्तफा के लिए
वो सजदा आज भी गवाह है कर्बला की रात में !!
क्या थी औक़ात यज़ीद की जो हुसैन को झुकाता
वो तो आया था कि ज़माने को जीना सिखाता
कर्बला की मिट्टी आज भी देती है ये सदा
जो हुसैनी बन गया उसे कोई मिटा नहीं पाता !!
जो बुझ न सकी वो मशाल है हुसैन
हर दौर के ज़ालिम का जवाब है हुसैन
ढूँढती है दुनिया जिसे इंसाफ़ के पन्नों में
उस पूरी शराफ़त की किताब है हुसैन !!

Muharram Shayari in English

Muharram Shayari in English
Shaheed-e-Karbala ka zikr sada rahega,
Haq aur sach ka parcham buland rahega.
Karbala ki zameen par likhi wafaa ki misaal,
Imam Hussain ka naam hai sab se bemisaal.
Karbala ki mitti se wafaa ki khushboo aati hai,
Hussain ka zikr sun kar aankh bhar aati hai.
Muharram ka chand gham ka paigham lata hai,
Karbala ka har manzar dil ko rula jata hai.
Har saal Muharram aata hai yaad dilane ko,
Karbala ke shaheedon ki qurbani sunane ko.

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